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संगत हमेंशा उच्च विचारोवालो की करे


हेल्लो दोस्तों, में हुँ आपका दोस्त दिव्येश एम. डाभी और स्वागत है आपका दिव्येश की दिव्यवाणी में...

अल्बर्ट आइंस्टाइन की "थियरी ऑफ़ रिलेटिविटी" काफी प्रसिद्ध हुई इस वजह से उन्हें लेक्चर देने के आमंत्रण मिलने लगे। अल्बर्ट आइंस्टाइन हमेंशा अपनी कार लेकर जाते और अपने ड्राइवर को साथ में रखते। लेक्चर के दौरान ड्राइवर पीछे पंक्ति में बैठकर आइंस्टाइन को सुनता।

एक दिन ड्राइवरने आइंस्टाइन से कहा, आपकी थियरी इतनी सरल है की में भी इस पर प्रवचन कर सकता हु। मैंने इतनी बार इसे सुना है की आपके प्रवचन का हर शब्द मुझे याद रह गया है।  

तब गुस्सा होने के बजाये आइंस्टाइन खुश हुए की उनकी थियरी इतनी सरल है की विज्ञान का जरा भी ज्ञान ना हो वो लोग भी इसे समज सकते है। उन दिनों मिडिया इतना बड़ा नहीं था इसलिए ज्यादातर लोग आइंस्टाइन को जानते तो थे पर उनके चेहरे से अनजान थे।

एक दिन प्रवचनमें जाते वक्त आइंस्टाइनने अपने ड्राइवर से कहा की आज मेरी जगह तुम प्रवचन दोगे। ड्राइवरने आइंस्टाइन जैसे कपडे पहन लिए और आइंस्टाइनने ड्राइवर जैसे। अब दोनों सेमीनार हॉल में गए।

पिछली पंक्ति में बैठकर आइंस्टाइन प्रवचन सुनने लगे। ड्राइवरने इतनी कुशलता से "थियरी ऑफ़ रिलेटिविटी" समझाया की किसी को कोई शक भी नहीं हुआ। आखिर में क्वेश्चन - आंसर सेशन हुआ जिसमे भी ड्राइवरने सभी का सही और सचोट जवाब दिया। क्युकी ज्यादातर प्रश्न हर बार सेमिनार में एक जैसे ही पूछे जाते थे। लेकिन अंत में एक इंसान ने ऐसा प्रश्न किया की ड्राइवर उल्जन में पड गया क्युकी ऐसा प्रश्न पहले कभी पूछा नहीं गया था। ड्राइवर को चिंता हुई की अब क्या करू? उसे लगा की अगर सबको पता चल जायेगा की एक ड्राइवर प्रवचन दे रहा था तो अच्छा नहीं लगेगा और आइंस्टाइन की इमेज भी ख़राब होगी।

मात्रा कुछ सेकंड सोच कर जरा भी डरे बिना ड्राइवरने उस इंसान को जवाब दिया की "आपका सवाल इतना सरल है की मेरा ड्राइवर भी इसका जवाब दे सकता है। मेरा ड्राइवर पिछली पंक्ति में बैठा है में उनसे विंनती करता हु की आपकी समस्या का समाधान करे...!!!"

अल्बर्ट आइंस्टाइन खुद ड्राइवर के जवाब से आश्चर्यचकित हो गए। आइंस्टाइनने ड्राइवर बनके उस इंसान को जवाब दिया और कार्यक्रम बिना किसी रूकावट पूरा हुआ।

इस कहानी से हम सीख सकते है की आप किस प्रकार की व्यक्ति से साथ रहते है ये बहुत मायने रखता है। अल्बर्ट आइंस्टाइन जैसे इंसान के साथ रहने से एक ड्राइवर भी इतना होशियार हो गया था। इंसान की संगत उसके जीवन में बहुत बड़ी भूमिका निभाती है। ये सिर्फ आपकी सक्सेस या फेलियर पर ही असर नहीं करता है बल्कि ये आपके पुरे भविष्य पर असर करता है तो इस बारे में ध्यान जरूर दे की आप किस तरह के लोगो की संगत में है। 

और आखिर में आपके विचार श्रेष्ठ ही होने चाहिए क्युकी दृष्टि का इलाज है दृष्टिकोण का नहीं।

आप इसे ऑडियो के स्वरुप में एपल पॉडकास्ट, स्पॉटीफाई, एंकर, गूगल जैसे अन्य पॉडकास्ट पर भी सुन सकते है। आप पॉडकास्ट इसे सब्स्क्राइब करना न भूले, अपना रिव्यु और स्टार रेटिंग जरूर दे।

आशा करता हूं कि आपको यह ब्लॉग अच्छा लगा होगा और आपके जीवन में बदलाव लाने में यह उपयोगी होगा। इस ब्लॉग को ज्यादा से ज्यादा लोगों को फॉरवर्ड कीजिए ताकि और किसी की जिंदगी में भी बदलाव आ सके। ऐसे ही और ब्लॉग को पढ़ने के लिए सब्सक्राइब करें हमारा चैनल दिव्येश एम डाभी और पढ़ते रहिए दिव्येश की दिव्य वाणी।

धन्यवाद  

दिव्येश एम डाभी

 

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